Search This Blog

Thursday, August 19, 2010

दोस्ती

फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,

सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,

सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,

दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,

काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,

जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,

रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,

रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,

तन्हाई में सहारा है दोस्ती,

मझधार में किनारा है दोस्ती,

जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,

किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,

हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,

हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,

Tuesday, August 3, 2010

संभव और असंभव

कहते है दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं पर मेरी नज़र में आज भी असंभव हे 


बचपन के पलो का वापस आना  
खुशियों के पलो का हरदम साथ रह पाना 
टूट कर बिखर चुके कांच का जुड़ जाना 
जिंदगी के पन्नो को अपने अनुसार जमा पाना  
                                    आज भी असंभव है 
 पर कुछ बाते है जो
                 आज भी संभव है 
   अपने कल को छोड़ आज को सवार पाना 
   कल के गमो को भुला कर अपने आज को खुशियों से भर पाना 
   तनहइयो में गम की रेत को छोड़ खुशियों के सागर में गोते लगाना
                                                आज भी संभव हे