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Wednesday, April 27, 2011
Wednesday, January 19, 2011
" डर" हरिवंश राय बच्चन की सर्वश्रेष्ठ कृति
लहरों से डरकर नोका पार नहीं होती
कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती
नन्ही चीटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़टी दीवारों पर बार बार फिसलती हे
मन का विशवास रगों में साहस भरता है
चढ़ कर गिरना, गिर कर चड़ना न अखरता है
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती , और कोशिश .......
डुबकिय सिन्धु में गोटा खोर लगता है
जा - जाकर खली हाथ लोट आता है
मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दूना उत्साह इसी हेरानी में
मुठ्ठी उसकी खली हर बार नहीं होती और कोशिश करने ............
असफलता एक चुनोती हे स्वीकार करो
क्या कमी रह गयी देखो और सुधार करो !
जब तक न सफल हो , नींद चेन को त्यागो तुम
संघर्षो का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती
और कोसिस करने ..............
कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती
नन्ही चीटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़टी दीवारों पर बार बार फिसलती हे
मन का विशवास रगों में साहस भरता है
चढ़ कर गिरना, गिर कर चड़ना न अखरता है
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती , और कोशिश .......
डुबकिय सिन्धु में गोटा खोर लगता है
जा - जाकर खली हाथ लोट आता है
मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दूना उत्साह इसी हेरानी में
मुठ्ठी उसकी खली हर बार नहीं होती और कोशिश करने ............
असफलता एक चुनोती हे स्वीकार करो
क्या कमी रह गयी देखो और सुधार करो !
जब तक न सफल हो , नींद चेन को त्यागो तुम
संघर्षो का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती
और कोसिस करने ..............
Monday, January 17, 2011
माँ
माँ ममता का नंदन वन है
माथे का पवन चन्दन है
पुत्र ह्रदय का स्पंदन है - २
माता तेरा अभिनन्दन है
कुमकुम बिंदिया रोली माता ! मीठी मीठी बोली माता
है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता - मेरी माता
पीड़ा का सागर सहकर के माँ मुझको धरती पर लाई
कोयल की मधुरं बोली से माँ ने मुझको लोरी सुनाई
माँ ने ही चलना सिखलाया, माँ ने ही जीना सिखलाया
अपने अंचल को भिगो कर
माँ ने अमृत दूध पिलाया
शीतल सी पुरवाई माता
सागर की गहराई माता
है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता मेरी माता - २
मन मेरा पर्वत गाता है वाणी है भगवान् है माता
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे ओछे लगते मुझको सारे
है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता मेरी माता
""वीर शिवाजी कोई न बनता जो जीजाबाई न होती
कोई कभी कर्ण न बनता जो कुंती माई न होती""
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