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Wednesday, January 19, 2011

" डर" हरिवंश राय बच्चन की सर्वश्रेष्ठ कृति

लहरों से डरकर नोका पार नहीं होती
कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती 
नन्ही चीटी जब दाना लेकर चलती है 
चढ़टी दीवारों पर बार बार फिसलती हे 
मन का विशवास रगों में साहस भरता है
चढ़ कर गिरना, गिर कर चड़ना न अखरता है 
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती , और कोशिश .......

डुबकिय सिन्धु में गोटा खोर लगता है
जा - जाकर खली हाथ लोट आता है 
मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में   
बढ़ता दूना उत्साह इसी हेरानी में 
मुठ्ठी उसकी खली हर बार नहीं होती और कोशिश करने ............

असफलता एक चुनोती हे स्वीकार करो 
क्या कमी रह गयी देखो और सुधार करो ! 
जब तक न सफल हो , नींद चेन को त्यागो तुम 
संघर्षो का मैदान छोड़ मत भागो तुम 
कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती 
                                          और कोसिस करने ..............