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Wednesday, January 19, 2011

" डर" हरिवंश राय बच्चन की सर्वश्रेष्ठ कृति

लहरों से डरकर नोका पार नहीं होती
कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती 
नन्ही चीटी जब दाना लेकर चलती है 
चढ़टी दीवारों पर बार बार फिसलती हे 
मन का विशवास रगों में साहस भरता है
चढ़ कर गिरना, गिर कर चड़ना न अखरता है 
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती , और कोशिश .......

डुबकिय सिन्धु में गोटा खोर लगता है
जा - जाकर खली हाथ लोट आता है 
मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में   
बढ़ता दूना उत्साह इसी हेरानी में 
मुठ्ठी उसकी खली हर बार नहीं होती और कोशिश करने ............

असफलता एक चुनोती हे स्वीकार करो 
क्या कमी रह गयी देखो और सुधार करो ! 
जब तक न सफल हो , नींद चेन को त्यागो तुम 
संघर्षो का मैदान छोड़ मत भागो तुम 
कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती 
                                          और कोसिस करने ..............

Monday, January 17, 2011

माँ

माँ ममता का नंदन वन है 
माथे का पवन चन्दन है 
पुत्र ह्रदय का स्पंदन है  - २ 
                                 माता तेरा अभिनन्दन है 
कुमकुम बिंदिया रोली माता ! मीठी मीठी बोली माता 
है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता - मेरी माता 
पीड़ा का सागर सहकर के माँ मुझको धरती पर लाई 
कोयल की मधुरं बोली से माँ ने मुझको लोरी सुनाई 
माँ ने ही चलना सिखलाया, माँ ने ही जीना सिखलाया 
                 अपने अंचल को भिगो कर 
                  माँ ने अमृत दूध पिलाया 
शीतल सी पुरवाई माता 
                                  सागर की गहराई माता 
है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता मेरी माता - २ 
 मन मेरा पर्वत गाता है वाणी है भगवान् है माता 
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे ओछे लगते मुझको सारे 
              है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता मेरी माता                
""वीर शिवाजी कोई न बनता जो जीजाबाई न होती
   कोई कभी कर्ण न बनता जो कुंती माई  न होती""              

Thursday, December 23, 2010

हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला

म्रदु भावो के अंगूरों की,
                             आज बना लाया हाला,
प्रियतम अपने ही हाथो से,
                             आज पिलाऊंगा प्याला,
पहले भोग लगा लू तेरा,
                             फिर प्रसाद जग पायेगा
सबसे पहले तेरा स्वागत
                             करती मेरी मधुशाला
                          २
प्यासा तुझे तो विश्व तपाकर
                                पूर्ण निकालूँगा हाला
एक पाँव से सकी बनकर
                              नाचूँगा लेकर प्याला
जीवन की मधुता तो तेरे
                            ऊपर कबका वार चूका
आज निछावर कर दूंगा में
                                तुझ पर जग की मधुशला

Friday, November 19, 2010

आजादी

 पक्षियों की ऊडान है  आजादी 
कल्पनाओ की पहचान है आजादी  
हर नवनिर्माण की जान है आजादी 
हर नवयूवक के लिए खुला  आसमान है आजादी 
सितार की हर झंकार है आजादी 
हर धनुष की तानकर है आजादी
हर जंग का महत्वपूर्ण आधार है आजादी 
आने वाले भविष्य की पुकार है आजादी 

Tuesday, November 16, 2010

याद

तेरी याद में कितने पल हम यु ही गवा बैठे,
कही आँखों की नींद, 
तो कही दिल का चैन गवा बैठे,
लोग कहते रहे की बदनाम गलियों में न घूम रे दीवाने पर 
उन्हें क्या पता हम उन्ही गलियों को अपना ठिकाना बना बैठे 

Thursday, August 19, 2010

दोस्ती

फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,

सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,

सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,

दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,

काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,

जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,

रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,

रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,

तन्हाई में सहारा है दोस्ती,

मझधार में किनारा है दोस्ती,

जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,

किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,

हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,

हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,