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Monday, January 17, 2011

माँ

माँ ममता का नंदन वन है 
माथे का पवन चन्दन है 
पुत्र ह्रदय का स्पंदन है  - २ 
                                 माता तेरा अभिनन्दन है 
कुमकुम बिंदिया रोली माता ! मीठी मीठी बोली माता 
है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता - मेरी माता 
पीड़ा का सागर सहकर के माँ मुझको धरती पर लाई 
कोयल की मधुरं बोली से माँ ने मुझको लोरी सुनाई 
माँ ने ही चलना सिखलाया, माँ ने ही जीना सिखलाया 
                 अपने अंचल को भिगो कर 
                  माँ ने अमृत दूध पिलाया 
शीतल सी पुरवाई माता 
                                  सागर की गहराई माता 
है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता मेरी माता - २ 
 मन मेरा पर्वत गाता है वाणी है भगवान् है माता 
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे ओछे लगते मुझको सारे 
              है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता मेरी माता                
""वीर शिवाजी कोई न बनता जो जीजाबाई न होती
   कोई कभी कर्ण न बनता जो कुंती माई  न होती""