माँ ममता का नंदन वन है
माथे का पवन चन्दन है
पुत्र ह्रदय का स्पंदन है - २
माता तेरा अभिनन्दन है
कुमकुम बिंदिया रोली माता ! मीठी मीठी बोली माता
है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता - मेरी माता
पीड़ा का सागर सहकर के माँ मुझको धरती पर लाई
कोयल की मधुरं बोली से माँ ने मुझको लोरी सुनाई
माँ ने ही चलना सिखलाया, माँ ने ही जीना सिखलाया
अपने अंचल को भिगो कर
माँ ने अमृत दूध पिलाया
शीतल सी पुरवाई माता
सागर की गहराई माता
है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता मेरी माता - २
मन मेरा पर्वत गाता है वाणी है भगवान् है माता
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे ओछे लगते मुझको सारे
है सारी श्रष्टि से बढकर मेरी माता मेरी माता
""वीर शिवाजी कोई न बनता जो जीजाबाई न होती
कोई कभी कर्ण न बनता जो कुंती माई न होती""
