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Thursday, December 23, 2010

हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला

म्रदु भावो के अंगूरों की,
                             आज बना लाया हाला,
प्रियतम अपने ही हाथो से,
                             आज पिलाऊंगा प्याला,
पहले भोग लगा लू तेरा,
                             फिर प्रसाद जग पायेगा
सबसे पहले तेरा स्वागत
                             करती मेरी मधुशाला
                          २
प्यासा तुझे तो विश्व तपाकर
                                पूर्ण निकालूँगा हाला
एक पाँव से सकी बनकर
                              नाचूँगा लेकर प्याला
जीवन की मधुता तो तेरे
                            ऊपर कबका वार चूका
आज निछावर कर दूंगा में
                                तुझ पर जग की मधुशला

Friday, November 19, 2010

आजादी

 पक्षियों की ऊडान है  आजादी 
कल्पनाओ की पहचान है आजादी  
हर नवनिर्माण की जान है आजादी 
हर नवयूवक के लिए खुला  आसमान है आजादी 
सितार की हर झंकार है आजादी 
हर धनुष की तानकर है आजादी
हर जंग का महत्वपूर्ण आधार है आजादी 
आने वाले भविष्य की पुकार है आजादी 

Tuesday, November 16, 2010

याद

तेरी याद में कितने पल हम यु ही गवा बैठे,
कही आँखों की नींद, 
तो कही दिल का चैन गवा बैठे,
लोग कहते रहे की बदनाम गलियों में न घूम रे दीवाने पर 
उन्हें क्या पता हम उन्ही गलियों को अपना ठिकाना बना बैठे 

Thursday, August 19, 2010

दोस्ती

फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,

सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,

सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,

दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,

काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,

जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,

रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,

रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,

तन्हाई में सहारा है दोस्ती,

मझधार में किनारा है दोस्ती,

जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,

किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,

हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,

हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,

Tuesday, August 3, 2010

संभव और असंभव

कहते है दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं पर मेरी नज़र में आज भी असंभव हे 


बचपन के पलो का वापस आना  
खुशियों के पलो का हरदम साथ रह पाना 
टूट कर बिखर चुके कांच का जुड़ जाना 
जिंदगी के पन्नो को अपने अनुसार जमा पाना  
                                    आज भी असंभव है 
 पर कुछ बाते है जो
                 आज भी संभव है 
   अपने कल को छोड़ आज को सवार पाना 
   कल के गमो को भुला कर अपने आज को खुशियों से भर पाना 
   तनहइयो में गम की रेत को छोड़ खुशियों के सागर में गोते लगाना
                                                आज भी संभव हे