Search This Blog

Tuesday, August 3, 2010

संभव और असंभव

कहते है दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं पर मेरी नज़र में आज भी असंभव हे 


बचपन के पलो का वापस आना  
खुशियों के पलो का हरदम साथ रह पाना 
टूट कर बिखर चुके कांच का जुड़ जाना 
जिंदगी के पन्नो को अपने अनुसार जमा पाना  
                                    आज भी असंभव है 
 पर कुछ बाते है जो
                 आज भी संभव है 
   अपने कल को छोड़ आज को सवार पाना 
   कल के गमो को भुला कर अपने आज को खुशियों से भर पाना 
   तनहइयो में गम की रेत को छोड़ खुशियों के सागर में गोते लगाना
                                                आज भी संभव हे
  


                                                     

No comments:

Post a Comment