कहते है दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं पर मेरी नज़र में आज भी असंभव हे
बचपन के पलो का वापस आना
खुशियों के पलो का हरदम साथ रह पाना
टूट कर बिखर चुके कांच का जुड़ जाना
जिंदगी के पन्नो को अपने अनुसार जमा पाना
आज भी असंभव है
पर कुछ बाते है जो
आज भी संभव है
अपने कल को छोड़ आज को सवार पाना
कल के गमो को भुला कर अपने आज को खुशियों से भर पाना
तनहइयो में गम की रेत को छोड़ खुशियों के सागर में गोते लगाना
आज भी संभव हे
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